पाकिस्तान का सिंध प्रांत इस वक्त एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मानवीय संकट से जूझ रहा है। सरकारें दावे करती रह जाती हैं, लेकिन जब सिस्टम पूरी तरह फेल हो जाता है, तो जनता को खुद अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ती है। सिंध के सुक्कुर में बबरलो बाईपास पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां नेशनल हाईवे को प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। यह सिर्फ एक आम चक्काजाम नहीं है, बल्कि उन बेबस माता-पिता की चीख है जिनके मासूम बच्चों को सरेआम अगवा कर लिया गया और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
'प्रिया कुमारी एक्शन कमेटी' के बैनर तले जुटे सैकड़ों लोगों ने नेशनल हाईवे को बंद कर सिंध और पंजाब के बीच के पूरे ट्रैफिक को रोक दिया। कई हफ्तों से प्रशासन को अल्टीमेटम दिया जा रहा था, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
सिंध में बच्चियों और मासूमों का खुलेआम शिकार
सोचिए उस मां पर क्या गुजरती होगी जिसका तीन साल का बच्चा अचानक गायब हो जाए? प्रदर्शन स्थल पर जो बैनर लगे हैं, वे किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल दहला देने के लिए काफी हैं। वहां 17 लापता बच्चों की तस्वीरें और उनके गायब होने की दर्दनाक कहानियां लिखी हैं। इनमें कोटरी (जामशोरो) से अगवा की गई महज तीन साल की एक मासूम बच्ची भी शामिल है। इसके अलावा लरकाना और खैरपुर जैसे इलाकों से भी किशोरों को दिनदहाड़े उठाया गया है।
इस पूरे आंदोलन का नाम 'प्रिया कुमारी' के नाम पर रखा गया है, जो साल 2021 में सुक्कुर से महज सात साल की उम्र में गायब कर दी गई थी। आज तक उस बच्ची का कुछ पता नहीं चला। सबसे हैरान करने वाली बात तो ये है कि इस बार के धरने में प्रिया कुमारी का परिवार शामिल नहीं हो सका। प्रदर्शनकारियों का खुला आरोप है कि प्रांतीय सरकार ने पीड़ित परिवार पर इतना भारी दबाव बनाया कि उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्या कोई चुनी हुई सरकार इस हद तक गिर सकती है?
पुलिस की नाकामी और डाकुओं का राज
सिंध का कच्चा इलाका (Katcha Area) लंबे समय से डाकुओं और अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। सिंधु नदी के किनारे फैले इन घने जंगलों में पुलिस घुसने से भी कतराती है। स्थानीय एक्टिविस्ट और पत्रकारों का कहना है कि पुलिस का रवैया बेहद शर्मनाक रहा है। कई मामलों में तो लापता बच्चों की एफआईआर (FIR) तक दर्ज नहीं की गई।
अपराधी बच्चों को अगवा करते हैं, उनके टॉर्चर के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं और फिर करोड़ों रुपये की फिरौती मांगते हैं। जो परिवार पैसे नहीं दे पाते, उनके बच्चे कभी घर वापस नहीं लौटते। सिंध की पुलिस और प्रशासन इन अपराधियों के सामने पूरी तरह लाचार और बेबस नजर आ रहे हैं। सुक्कुर और खैरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों को मनाने पहुंचे जरूर, लेकिन बिना किसी ठोस आश्वासन के जनता ने हाईवे खाली करने से साफ मना कर दिया।
अब आगे क्या होना चाहिए
सिंध में जब तक अपराधियों के खिलाफ मिलिट्री या रेंजर्स का कोई बड़ा और निर्णायक ऑपरेशन नहीं चलाया जाता, तब तक यह खौफनाक खेल बंद नहीं होने वाला। केवल हाईवे ब्लॉक करने से शायद कुछ दिनों के लिए दबाव बने, लेकिन परमानेंट समाधान के लिए इन डाकुओं के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ना होगा। प्रांतीय सरकार को राजनीतिक दबाव बनाने के बजाय पीड़ित परिवारों को सुरक्षा देनी होगी और पुलिस जवाबदेही तय करनी होगी। जनता का यह विरोध प्रदर्शन साफ चेतावनी है कि अगर अब भी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो पूरा सूबा पूरी तरह अराजकता की आग में झुलस जाएगा।